विचाराधीन कैदी की हिरासत नहीं बढ़ाई जा सकती, कोविड में भी नहीं - bhaskarhindi.com

Dainik Bhaskar Hindi - bhaskarhindi.com, नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने माना है कि चूक जमानत (डिफॉल्ट बेल) संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है और एक विचाराधीन कैदी की हिरासत को महामारी के समय में भी यांत्रिक रूप से नहीं बढ़ाया जा सकता। दहेज हत्या के एक आरोपी की जमानत याचिका पर रविवार को सुनवाई करते हुए

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